अनुशासन पर्व  अध्याय ८२

भीष्म उवाच

पुत्रार्थी लभते पुत्रं कन्या पतिमवाप्नुय़ात् |  ४६   क
धनार्थी लभते वित्तं धर्मार्थी धर्ममाप्नुय़ात् ||  ४६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति