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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८२
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अर्जुन उवाच
इत्येवमुक्तो विजय़ः प्रसन्नात्माव्रवीदिदम् |  २२   क
सर्वं मे सुप्रिय़ं देवि यदेतत्कृतवत्यसि ||  २२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति