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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८२
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अर्जुन उवाच
उपय़ास्यामि धर्मज्ञ भवतः शासनादहम् |  २६   क
अश्वमेधे महाय़ज्ञे द्विजातिपरिवेषकः ||  २६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति