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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८२
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अर्जुन उवाच
मम त्वनुग्रहार्थाय़ प्रविशस्व पुरं स्वकम् |  २७   क
भार्याभ्यां सह शत्रुघ्न मा भूत्तेऽत्र विचारणा ||  २७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति