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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८२
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अर्जुन उवाच
तमुवाचोरगपतेर्दुहिता प्रहसन्त्यथ |  ५   क
न मे त्वमपराद्धोऽसि न नृपो वभ्रुवाहनः |  ५   ख
न जनित्री तथास्येय़ं मम या प्रेष्यवत्स्थिता ||  ५   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति