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शान्ति पर्व
अध्याय ८४
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भीष्म उवाच
तेषां त्रय़ाणां विविधं विमर्शं; वुध्येत चित्तं विनिवेश्य तत्र |  ५०   क
स्वनिश्चय़ं तं परनिश्चय़ं च; निवेदय़ेदुत्तरमन्त्रकाले ||  ५०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति