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वन पर्व
अध्याय ८२
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पुलस्त्य उवाच
तत्राश्रमो वसिष्ठस्य त्रिषु लोकेषु विश्रुतः |  १२१   क
तत्राभिषेकं कुर्वाणो वाजपेय़मवाप्नुय़ात् ||  १२१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति