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वन पर्व
अध्याय ८२
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पुलस्त्य उवाच
शिखरं वै महादेव्या गौर्यास्त्रैलोक्यविश्रुतम् |  १३१   क
समारुह्य नरः श्राद्धः स्तनकुण्डेषु संविशेत् ||  १३१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति