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वन पर्व
अध्याय ८२
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पुलस्त्य उवाच
औद्दालकं महाराज तीर्थं मुनिनिषेवितम् |  १४०   क
तत्राभिषेकं कुर्वीत सर्वपापैः प्रमुच्यते ||  १४०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति