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वन पर्व
अध्याय ८२
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पुलस्त्य उवाच
कपिलावटं च गच्छेत तीर्थसेवी नराधिप |  २७   क
उष्यैकां रजनीं तत्र गोसहस्रफलं लभेत् ||  २७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति