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वन पर्व
अध्याय ८२
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पुलस्त्य उवाच
रुद्रावर्तं ततो गच्छेत्तीर्थसेवी नराधिप |  ३३   क
तत्र स्नात्वा नरो राजन्स्वर्गलोके महीय़ते ||  ३३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति