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वन पर्व
अध्याय ८२
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पुलस्त्य उवाच
ऋषिकुल्यां नरः स्नात्वा ऋषिलोकं प्रपद्यते |  ४४   क
यदि तत्र वसेन्मासं शाकाहारो नराधिप ||  ४४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति