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वन पर्व
अध्याय ८२
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पुलस्त्य उवाच
ततो वै व्राह्मणीं गत्वा व्रह्मचारी जितेन्द्रिय़ः |  ५२   क
पद्मवर्णेन यानेन व्रह्मलोकं प्रपद्यते ||  ५२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति