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वन पर्व
अध्याय ८२
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पुलस्त्य उवाच
विमलाशोकमासाद्य विराजति यथा शशी |  ६२   क
तत्रोष्य रजनीमेकां स्वर्गलोके महीय़ते ||  ६२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति