वन पर्व  अध्याय ८९

वैशम्पाय़न उवाच

एवं सम्भाषमाणे तु धौम्ये कौरवनन्दन |  १   क
लोमशः सुमहातेजा ऋषिस्तत्राजगाम ह ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति