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वन पर्व
अध्याय ८२
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पुलस्त्य उवाच
तस्मिन्सरसि राजेन्द्र व्रह्मणो यूप उच्छ्रितः |  ७५   क
यूपं प्रदक्षिणं कृत्वा वाजपेय़फलं लभेत् ||  ७५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति