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वन पर्व
अध्याय ८२
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पुलस्त्य उवाच
तत्र सन्ध्यामुपासीत व्राह्मणः संशितव्रतः |  ८२   क
उपास्ता च भवेत्सन्ध्या तेन द्वादशवार्षिकी ||  ८२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति