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सभा पर्व
अध्याय ४८
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दुर्योधन उवाच
विराटेन तु मत्स्येन वल्यर्थं हेममालिनाम् |  २५   क
कुञ्जराणां सहस्रे द्वे मत्तानां समुपाहृते ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति