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वन पर्व
अध्याय ८२
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पुलस्त्य उवाच
तत्रोदपानो धर्मज्ञ त्रिषु लोकेषु विश्रुतः |  ९४   क
तत्राभिषेकं कृत्वा तु वाजिमेधमवाप्नुय़ात् ||  ९४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति