वन पर्व  अध्याय ८२

पुलस्त्य उवाच

ततोऽधिवंश्यं धर्मज्ञ समाविश्य तपोवनम् |  ९८   क
गुह्यकेषु महाराज मोदते नात्र संशय़ः ||  ९८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति