द्रोण पर्व  अध्याय ७६

सञ्जय़ उवाच

लोहिताक्षौ महावाहू संय़त्तौ कृष्णपाण्डवौ |  ३२   क
सिन्धुराजमभिप्रेक्ष्य हृष्टौ व्यनदतां मुहुः ||  ३२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति