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कर्ण पर्व
अध्याय ५६
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सञ्जय़ उवाच
कर्णपुत्रौ च राजेन्द्र भ्रातरौ सत्यविक्रमौ |  ५६   क
अनाशय़ेतां वलिनः पाञ्चालान्वै ततस्ततः |  ५६   ख
तत्र युद्धं तदा ह्यासीत्क्रूरं विशसनं महत् ||  ५६   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति