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अनुशासन पर्व
अध्याय ४३
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देवशर्मो उवाच
अहोरात्रं विजानाति ऋतवश्चापि नित्यशः |  ९   क
पुरुषे पापकं कर्म शुभं वा शुभकर्मणः ||  ९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति