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भीष्म पर्व
अध्याय ८२
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सञ्जय़ उवाच
प्रावर्तत नदी घोरा शोणितौघतरङ्गिणी |  ४२   क
गोमाय़ुगणसङ्कीर्णा क्षणेन रजनीमुखे ||  ४२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति