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भीष्म पर्व
अध्याय ८२
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सञ्जय़ उवाच
कृतस्वस्त्ययनाः सर्वे संस्तूय़न्तश्च वन्दिभिः |  ५४   क
गीतवादित्रशव्देन व्यक्रीडन्त यशस्विनः ||  ५४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति