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द्रोण पर्व
अध्याय ८२
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सञ्जय़ उवाच
दुर्मुखस्य तु भल्लेन छित्त्वा केतुं महावलः |  २२   क
जघान चतुरो वाहांश्चतुर्भिर्निशितैः शरैः ||  २२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति