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द्रोण पर्व
अध्याय ८२
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सञ्जय़ उवाच
विसृजन्तः शरांश्चैव तोमरांश्च सहस्रशः |  ३४   क
भिण्डिपालांस्तथा प्रासान्मुद्गरान्मुसलानपि ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति