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वन पर्व
अध्याय १७०
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अर्जुन उवाच
त्रिदशेशद्विषो यावत्क्षय़मस्त्रैर्नय़ाम्यहम् |  १४   क
न कथञ्चिद्धि मे पापा न वध्या ये सुरद्विषः ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति