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शान्ति पर्व
अध्याय ८३
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राजो उवाच
ये त्वां व्राह्मण नेच्छन्ति न ते वत्स्यन्ति मे गृहे |  ५६   क
भवतैव हि तज्ज्ञेय़ं यदिदानीमनन्तरम् ||  ५६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति