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अनुशासन पर्व
अध्याय ८३
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भीष्म उवाच
साक्षान्नेह मनुष्यस्य पितरोऽन्तर्हिताः क्वचित् |  १८   क
गृह्णन्ति विहितं त्वेवं पिण्डो देय़ः कुशेष्विति ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति