आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ८३

वैशम्पाय़न उवाच

स राजा व्यथितो व्यश्वो विधनुर्हतसारथिः |  १९   क
गदामादाय़ कौन्तेय़मभिदुद्राव वेगवान् ||  १९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति