आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ८३

वैशम्पाय़न उवाच

तस्यापतत एवाशु गदां हेमपरिष्कृताम् |  २०   क
शरैश्चकर्त वहुधा वहुभिर्गृध्रवाजितैः ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति