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वन पर्व
अध्याय ८१
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पुलस्त्य उवाच
तस्मिन्कुञ्जे नरः स्नात्वा गोसहस्रफलं लभेत् |  ९४   क
कन्यातीर्थे नरः स्नात्वा अग्निष्टोमफलं लभेत् ||  ९४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति