वन पर्व  अध्याय ८३

पुलस्त्य उवाच

अथ सन्ध्यां समासाद्य संवेद्यं तीर्थमुत्तमम् |  १   क
उपस्पृश्य नरो विद्वान्भवेन्नास्त्यत्र संशय़ः ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति