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वन पर्व
अध्याय ८३
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पुलस्त्य उवाच
ततो महेन्द्रमासाद्य जामदग्न्यनिषेवितम् |  १४   क
रामतीर्थे नरः स्नात्वा वाजिमेधफलं लभेत् ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति