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वन पर्व
अध्याय ८३
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पुलस्त्य उवाच
सर्वदेवह्रदे स्नात्वा गोसहस्रफलं लभेत् |  ३६   क
जातिमात्रह्रदे स्नात्वा भवेज्जातिस्मरो नरः ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति