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सभा पर्व
अध्याय ५२
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विदुर उवाच
जानाम्यहं द्यूतमनर्थमूलं; कृतश्च यत्नोऽस्य मय़ा निवारणे |  ११   क
राजा तु मां प्राहिणोत्त्वत्सकाशं; श्रुत्वा विद्वञ्श्रेय़ इहाचरस्व ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति