वन पर्व  अध्याय ८३

पुलस्त्य उवाच

ततो गच्छेत राजेन्द्र प्रय़ागमृषिसंस्तुतम् |  ६५   क
यत्र व्रह्मादय़ो देवा दिशश्च सदिगीश्वराः ||  ६५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति