उद्योग पर्व  अध्याय ८३

वैशम्पाय़न उवाच

विशेषतश्च वासार्थं सभां ग्रामे वृकस्थले |  १६   क
विदधे कौरवो राजा वहुरत्नां मनोरमाम् ||  १६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति