उद्योग पर्व  अध्याय ८३

वैशम्पाय़न उवाच

उपय़ास्यति दाशार्हः पाण्डवार्थे पराक्रमी |  ५   क
स नो मान्यश्च पूज्यश्च सर्वथा मधुसूदनः ||  ५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति