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भीष्म पर्व
अध्याय ८३
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सञ्जय़ उवाच
ततः शूराः समासाद्य समरे ते परस्परम् |  २४   क
नेत्रैरनिमिषै राजन्नवैक्षन्त प्रकोपिताः ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति