द्रोण पर्व  अध्याय ८३

सञ्जय़ उवाच

उच्चावचानि रूपाणि चकार सुवहूनि च |  २७   क
उच्चावचास्तथा वाचो व्याजहार समन्ततः ||  २७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति