अनुशासन पर्व  अध्याय ३०

भीष्म उवाच

सुदुष्करं वहन्योगं कृशो धमनिसन्ततः |  २   क
त्वगस्थिभूतो धर्मात्मा स पपातेति नः श्रुतम् ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति