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शान्ति पर्व
अध्याय ८४
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भीष्म उवाच
सर्वलोकं समं शक्तः सान्त्वेन कुरुते वशे |  ४२   क
तस्मै मन्त्रः प्रय़ोक्तव्यो दण्डमाधित्सता नृप ||  ४२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति