शान्ति पर्व  अध्याय ४७

वैशम्पाय़न उवाच

पञ्चभूतात्मभूताय़ भूतादिनिधनात्मने |  ५३   क
अक्रोधद्रोहमोहाय़ तस्मै शान्तात्मने नमः ||  ५३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति