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शान्ति पर्व
अध्याय ८४
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भीष्म उवाच
कुलीना देशजाः प्राज्ञा रूपवन्तो वहुश्रुताः |  ५   क
प्रगल्भाश्चानुरक्ताश्च ते तव स्युः परिच्छदाः ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति