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द्रोण पर्व
अध्याय ५७
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सञ्जय़ उवाच
इदं वाक्यं महातेजा वभाषे पुष्करेक्षणः |  १५   क
हितार्थं पाण्डुपुत्रस्य सैन्धवस्य वधे वृतः ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति