अनुशासन पर्व  अध्याय ८४

देवा ऊचुः

अग्निशापादजिह्वापि रसज्ञानवहिष्कृताः |  ३०   क
सरस्वतीं वहुविधां यूय़मुच्चारय़िष्यथ ||  ३०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति