अनुशासन पर्व  अध्याय ८४

देवा ऊचुः

शशाप ज्वलनः सर्वान्द्विरदान्क्रोधमूर्छितः |  ३४   क
प्रतीपा भवतां जिह्वा भवित्रीति भृगूद्वह ||  ३४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति