अनुशासन पर्व  अध्याय ८४

देवा ऊचुः

अपत्यं तेजसा युक्तं प्रवीरं जनय़ प्रभो |  ५०   क
यद्भय़ं नोऽसुरात्तस्मान्नाशय़ेद्धव्यवाहन ||  ५०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति